अपराध

बड़ी खबर :कोर्ट ने सोहगीबरवा थाना के एसआई व सिपाही के खिलाफ केस दर्ज कर विवेचना का जारी किया आदेश


महराजगंज टाइम्स ब्यूरो:- सिविल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अनन्य विशेष न्यायालय व अपर सत्र न्यायाधीश ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद सोहगीबरवा थाना के एसआई सुनील कुमार वर्मा व सिपाही सुरेन्द्र वर्मा के खिलाफ सोहगीबरवा थानाध्यक्ष को केस दर्ज कर विवेचना का आदेश जारी किया है। पत्रावली के मुताबिक सोहगीबरवा निवासी सुभाष गौड ने धारा 156 (3) दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत प्रार्थनापत्र आरोपित सुनील कुमार वर्मा (दरोगा) व सुरेन्द्र वर्मा सिपाही के विरूद्ध थाने पर मुकदमा पंजीकृत कराने के लिए कोर्ट में प्रस्तुत किया था। जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश जारी किया है। पत्रावली के मुताबिक आवेदक ने कोर्ट को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसके डीह की जमीन पर ध्रुव व उनका पुत्र कन्हैया कब्जा करने की नियत से लाठी डंडा कुदाल लेकर आये और फसल नष्ट कर कब्जा करने का प्रयास करने लगे। विरोध करने पर आरोपितों ने सोहगीबरवा थाने की पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। पुलिस सुभाष गौड़ व उसके भाई विनय को थाने ले गयी। स्थानीय थाने का दरोगा सुनील कुमार वर्मा व सिपाही सुरेन्द्र वर्मा बीस हजार रूपये रिश्वत की मांग करने लगे। मांग पूरी न करने पर उसको व उसके भाई विनय को लाकअप में बन्द कर दिया। रात में लाकअप में ही दरोगा सुनील कुमार वर्मा व सिपाही सुरेन्द्र वर्मा बूट फाईट से सीने, पेट व घुटने पर लगातर मारते रहे। हाथ के पंजो को बूट से रगड़ दिए। उसके सीने पर दरोगा सुनील कुमार वर्मा हत्या करने की नियत से चढ़कर बूट से दबाने लगा। उसका भाई बचाने का प्रयास किया तो उसको भी बुरी तरह से मारा पीटा। सिपाही सुरेन्द्र वर्मा उसके दोनो जांघो पर चढ़ गया और मां बहन की गाली देते हुए जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उसको सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया। दूसरे दिन दरोगा लाकअप से बाहर निकालकर थाने में मौजूद सार्वजनिक लोगों के सामने जाति सूचक का इस्तेमाल करते हुए उन्हें मारा पीटा। जान से मारने की धमकी दिया। उसने अपना इलाज कराया और उसके सीने पर अभी भी अन्दरूनी चोट  थी।आवेदक द्वारा  जाति प्रमाणपत्र की छायाप्रति तथा इंजरी रिपोर्ट की छायाप्रति को प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न किया। प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने थानाध्यक्ष सोहगीबरवा को आदेश दिया कि वह उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत करने के उपरान्त मामले की विवेचना नियमानुसार करें। इसका अनुपालन अन्दर 7 दिन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

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