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बिना काउंसलिंग ढाई सौ शिक्षकों का समायोजन, नियमों की उड़ाई धज्जियां,सीडीओ करेंगे जांच, बीएसए से मांगी गई रिपोर्ट

 

महराजगंज टाइम्स ब्यूरो : जनपद में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। शासन द्वारा जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद विकल्प, वरिष्ठता और विशेष श्रेणी के नियमों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से समायोजन किए जाने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद शिक्षकों में नाराजगी फैल गई और यह प्रकरण जिलाधिकारी तक जा पहुंचा। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि जिले में करीब ढाई सौ ऐसे शिक्षकों का समायोजन किया गया है, जिनके विद्यालयों में छात्र संख्या मानक से कम है। शासनादेश के अनुसार पहले दिव्यांग महिला व पुरुष शिक्षकों, फिर महिला शिक्षकों और उसके बाद अन्य शिक्षकों से विकल्प लेकर समायोजन किया जाना था। इसके लिए काउंसलिंग भी प्रस्तावित थी, लेकिन आरोप है कि काउंसलिंग निरस्त कर बीएसए कार्यालय ने सीधे समायोजन पत्र जारी कर दिए। सूची सार्वजनिक करने के बजाय शिक्षकों को व्यक्तिगत पत्र थमाए गए, जिससे संदेह और बढ़ गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि एक महिला शिक्षिका से कोई विकल्प लिए बिना उन्हें वनग्राम के दुर्गम विद्यालय में भेज दिया गया। वहीं कई मामलों में वरिष्ठता क्रम को दरकिनार कर सीनियर शिक्षकों को छोड़ जूनियर शिक्षकों का समायोजन कर दिया गया, जबकि नियम के अनुसार पहले वरिष्ठ शिक्षक को हटाया जाना चाहिए। इन विसंगतियों को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने डीएम से मुलाकात की। डीएम ने सीडीओ को तत्काल जांच के निर्देश दिए। सीडीओ महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बीएसए से रिपोर्ट मांगी गई है और सभी बिंदुओं की गहन जांच कर शासनादेश के अनुसार ही समायोजन प्रक्रिया को दुरुस्त किया जाएगा। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

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