Maharajganj

शादी में हो गया खेला: तिलक चढ़ाया, पर बहन की विदाई से किया साफ इंकार!

 

जीजा ने दिखाए तेवर, रिश्तेदारों की जुटी पंचायत

महराजगंज टाइम्स ब्यूरो:- कहते हैं कि शादियों में बिना किसी नोक-झोंक के काम बन जाए, तो वह शादी ही क्या? लेकिन महराजगंज से लखनऊ पहुंची बारात में तो गजब ही हो गया। यहां एक दूल्हे को तिलक चढ़ाया गया, सारे रस्म-रिवाज हुए, लेकिन जब बात बहन की विदाई की आई तो तिलक चढ़ाने वाले महाशय ने दो टूक कह दिया कि तिलक ले लो, पर मेरी बहन की विदाई नहीं होगी! बस फिर क्या था? पूरे मंडप में सन्नाटा पसर गया। रिश्तेदार हैरान हो गए और आनन-फानन में पंचायत बुला ली गई।

पंचायत में उठी मांग- तिलक वापस ले जाओ या बहन की विदाई कराओ

मामला इतना पेचीदा था कि अनुभवी बुजुर्गों को बीच में बैठना पड़ा। पंचायत में चर्चा होने लगी कि आखिर जिस शख्स ने अभी-अभी बेदी पर बैठकर इतने प्यार से तिलक चढ़ाया, वह अचानक इतना कठोर कैसे हो गया? लोग कानाफूसी करने लगे कि क्या लड़के वालों ने दहेज अधिक मांग लिया या फिर तिलक चढ़ाने वाले का मन बदल गया है? रिश्तेदारों ने दबाव बनाया कि भाई जब तिलक की रस्म पूरी हो गई है, तो अब शास्त्र सम्मत लड़की की विदाई भी होनी चाहिए। माहौल में तनाव ऐसा था कि मानो अभी तीसरा विश्व युद्ध यहीं छिड़ जाएगा।

जब खुला राज तो ठहाकों से गूंज उठा पंडाल

जब पंचायत ने पूछा कि आखिर जब तिलक चढ़ाया तो फिर बहन की विदाई क्यों नहीं करेंगे, तब जाकर जो सच सामने आया, उसने वहां मौजूद हर शख्स को लोट-पोट कर दिया। दरअसल, जिसे लोग लड़की का भाई समझकर तिलक चढ़ाते देख रहे थे, वह कोई और नहीं बल्कि दूल्हे के जीजा जी थे। दूल्हे के यहां परंपरा है कि तिलक चढ़ने के बाद जीजा जी भी उसी बेदी पर बैठते हैं और कुछ खास रस्में पूरी करते हैं। दूर से देखने वालों को लगा कि जीजा जी ही लड़की के भाई हैं। अब भला जीजा जी अपनी बहन की विदाई कराकर अपने ही साले के साथ क्यों जाने देते। उन्होंने तो बस अपने ससुराल की परम्परा को निभाया था। अगली बार तिलक चढ़ते देखें, तो पहले चेहरा पहचान लें, वरना महाराजगंज की इस पंचायत की तरह आप भी बिना बात के परेशान हो जाएंगे।

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