मृत समझकर कर दिया था अंतिम संस्कार, पांच साल बाद जिंदा लौटी इशरावती
महराजगंज टाइम्स ब्यूरो:- जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस महिला को परिजनों ने मृत समझकर पांच साल पहले अंतिम संस्कार कर दिया था, वही महिला अब सकुशल अपने घर लौट आई है। मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद महराजगंज पुलिस ने जांच कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक वर्ष 2021 में बरामद अज्ञात महिला के शव की पहचान परिजनों ने गलती से इशरावती के रूप में कर ली थी। पुलिस के अनुसार 1 अप्रैल 2021 को कोल्हुई थाना क्षेत्र के लबदहा गांव के दक्षिण-पूर्व स्थित खेत में करीब 42 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला का शव बरामद हुआ था। शव की तत्काल पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने पंचायतनामा की कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम कराया और पहचान के लिए समाचार पत्रों, सोशल मीडिया तथा स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कराया।अगले दिन नौतनवा क्षेत्र की रहने वाली गमला देवी अपने बेटे और भाभी के साथ थाने पहुंचीं। उन्होंने शव की पहचान अपनी बहन इशरावती पुत्री स्वर्गीय चीनक साहनी, निवासी बरगदही, थाना सोनौली के रूप में की। पुलिस के मुताबिक परिजनों ने चेहरे, कपड़ों और चप्पलों के आधार पर शव की पहचान की थी। इसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया और त्रिमुहानी घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम में महिला की मौत का कारण सेप्टीसीमिया/शॉक यानी गंभीर संक्रमण बताया गया था। शव करीब पांच से सात दिन पुराना था। पंचायतनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच में किसी आपराधिक कृत्य, रंजिश या साजिश के साक्ष्य नहीं मिले थे। इधर, मानसिक रूप से अस्वस्थ इशरावती भटकते हुए कोलकाता पहुंच गई थीं। वहां एक सामाजिक संस्था ने उन्हें आश्रय दिया। 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के मौके पर संस्था की टीम इशरावती को लेकर उनके पैतृक गांव बरगदही पहुंची और परिजनों के सुपुर्द किया।पुलिस ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि वर्ष 2021 में बरामद शव की पहचान परिजनों ने कपड़ों और हुलिए के आधार पर भूलवश गलत कर दी थी। फिलहाल इशरावती सुरक्षित अपने परिवार के साथ रह रही हैं।
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