Maharajganj

महराजगंज जिला अस्पताल में दलालों का कथित नेटवर्क! डॉक्टरों के चैंबर तक बाहरी मेडिकल स्टोर संचालकों की पहुंच

 

मुफ्त दवा और जांच के बावजूद मरीजों की जेब पर पड़ रही मार, निजी पैथोलॉजी और मेडिकल स्टोर की भूमिका पर उठे सवाल

महराजगंज टाइम्स ब्यूरो :- जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच कथित बिचौलियों की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल परिसर से लेकर ओपीडी, पर्चा काउंटर और जांच कक्षों के आसपास सक्रिय कुछ लोग मरीजों को गुमराह कर निजी मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटर तक पहुंचा रहे हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला है।

डॉक्टरों के चैंबर तक बाहरी लोगों की पहुंच पर सवाल

सबसे गंभीर आरोप अस्पताल के डॉक्टरों के चैंबर में बाहरी मेडिकल स्टोर संचालकों और उनके प्रतिनिधियों की कथित मौजूदगी को लेकर हैं। आरोप है कि कुछ लोग मरीजों के पर्चे देखते हैं और उन्हें बाहर से दवाएं खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं। मरीजों को डॉक्टर से दिखाने के बाद निजी दुकानों तक ले जाने की शिकायतें भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल के संवेदनशील हिस्सों में बाहरी लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण की जिम्मेदारी किसकी है? क्या अस्पताल प्रशासन को इस गतिविधि की जानकारी है और यदि है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?

मुफ्त जांच और दवाओं के बावजूद निजी केंद्रों का सहारा

सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बावजूद मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों पर जांच कराने की सलाह दिए जाने के आरोप भी हैं। कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा अस्पताल की लैब में रिपोर्ट मिलने में देरी का हवाला देकर मरीजों को बाहर भेजा जाता है। इसी तरह, अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बावजूद बाहर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए प्रेरित किए जाने की शिकायतों की भी जांच जरूरी है। यदि किसी मरीज को वास्तव में आवश्यक सुविधा अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहर जाना पड़ता है, तो यह अलग स्थिति है। लेकिन यदि उसे जानबूझकर निजी केंद्रों पर भेजा जा रहा है या इसके पीछे कमीशन का खेल है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

ग्रामीण और गरीब मरीजों की परेशानी बढ़ने का आरोप

दूरदराज के गांवों से इलाज कराने आने वाले मरीज अक्सर अस्पताल की प्रक्रियाओं से पूरी तरह परिचित नहीं होते। ऐसे में उन्हें जल्दी इलाज दिलाने, लंबी कतार से बचाने या बेहतर सुविधा दिलाने का भरोसा देकर निजी प्रतिष्ठानों तक ले जाने की आशंका बनी रहती है। एम्बुलेंस सेवा के नाम पर अवैध वसूली के आरोप भी गंभीर हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना आवश्यक है।

सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कैसे सक्रिय हैं बिचौलिए?

अस्पताल परिसर में सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यदि बाहरी लोग डॉक्टरों के चैंबर तक पहुंच रहे हैं, तो यह निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अस्पताल प्रशासन को बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही नियंत्रित करने, संदिग्ध गतिविधियों की जांच कराने और मरीजों को मुफ्त उपलब्ध सरकारी सुविधाओं की जानकारी देने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। क्या जिला अस्पताल में कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच होगी? क्या डॉक्टरों के चैंबर में बाहरी लोगों की मौजूदगी और निजी मेडिकल स्टोर व पैथोलॉजी सेंटरों को मरीज भेजने के आरोपों की पड़ताल की जाएगी? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई से ही मिल सकेगा।

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